पटना, “अब आपको पता करना पड़ेगा कि आप प्रेम करते हैं या लोभ. क्यूँकि बहुत सारे लोग जो कहते हैं कि मुझे प्रेम है उन्हें प्रेम नहीं बल्कि लोभ होता है. मैं रचनाकार को बह...
पटना, 27 अक्टूबर, आई.आई.बी.एम. सभागार में साहित्यिक संस्था “आयाम – साहित्य का स्त्री स्वर” द्वारा हिन्दी और उर्दू की प्रसिद्ध साहित्यकार डा. शहनाज फातमी...
मेरे मायके में भी लड़कियों को बोझ समझे जाने की मानसिकता चरम पर थी. इतनी कि जब तीसरी बेटी के रूप में मेरा जन्म हुआ मेरे डॉक्टर पिता डिप्रेशन में आकर रो पड़े थें और दादा ने ग...
“घर से दूर नया ठिकाना अब यही खुशियों का आशियाना, वो दोस्तों के संग हुल्लड़पन वो नटखट सा मेरा बचपन, हाँ अपनी यादें समेटकर गलियों की खुशबू बटोरकर दुनिया को दिखाने अपना ह...