अपने बच्चों संग माताओं ने बढ़ चढ़कर 'मदर्स डे सेलिब्रेशन' में लिया हिस्सा

नयागांव, सारण, 5 मई : इंटरनेशनल स्कॉलर्स स्कूल में मातृ दिवस बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाया गया। य...

जातिगत असमानता और मुस्लिम मूल्य

मुस्लिम समाज में जातिगत पहचान और असमानता का मुद्दा सदियों से एक जटिल सामाजिक समस्या रहा है, जिसे इस्...

चमकते आंकड़े, थका हुआ श्रमिक : 1 मई, अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस पर विशेष

हर वर्ष 1 मई को अंतर्राष्ट्रीय श्रमिक दिवस मनाया जाता है। यह दिन केवल एक प्रतीकात्मक अवसर नहीं, बल्क...

प्रचंड गर्मी में ‘लू’ लगने की संभावना एवं समाधान

देश के अनेक भागों में अधिक तापमान तेजी से बढ़ता जा रहा है। अब यह तापमान 44 डिग्री पार करने वाला है।...

19 अप्रैल, अक्षय तृतीया पर विशेष : इस पर्व पर व्यक्ति --

सनातन धर्म में अक्षय तृतीया का बहुत महत्व होता है। इस दिन मां लक्ष्मी की विशेष पूजा आराधना करने पर घ...

आंबेडकर का भारत: सपना या सत्य (आंबेडकर जयंती पर विशेष)

14 अप्रैल का दिन भारतीय लोकतंत्र के आत्ममंथन का अवसर है, क्योंकि यह उस व्यक्तित्व की जयंती है जिसने...

पटना से 40 दिव्यांगों का दल चला वैष्णोदेवी यात्रा पर

पटना से 40 दिव्यांगों का दल चला वैष्णोदेवी यात्रा पर
पटना, 29 अगस्त, “जोर से बोलो जय माता दी, जय माता दी, जय माता दी…” पटना रेलवे स्टेशन स्थित टिकट काउंटर के पास खूब जोरों से यह जयकारे लगाए जा रहे थें....
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सिर्फ अपनी बहन की रक्षा क्यों ?

सिर्फ अपनी बहन की रक्षा क्यों ?
“बंधवा लो राखी, खा लो मिठाई और तोहफे में भइया ये वचन तुम हमें देना, जैसे करते हो मेरी इज्जत वैसे ही गैर लड़कियों को भी रिसपेक्ट तुम देना. तुम्हारे इस तोहफे से देखना...
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पहली बार खुद से अपनी जरुरत का सारा सामान खरीदी थी : रितु तिवारी

पहली बार खुद से अपनी जरुरत का सारा सामान खरीदी थी : रितु तिवारी
“घर से दूर नया ठिकाना  अब यही खुशियों का आशियाना, वो दोस्तों के संग हुल्लड़पन  वो नटखट सा मेरा बचपन, हाँ अपनी यादें समेटकर  गलियों की खुशबू बटोरकर  दुनिया को दिखाने...
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ग्रूमिंग के दौरान नर्वस हो जानेवाली अल्का सिंह ऐसे बनीं ‘स्रिया मिस इण्डिया 2017’ की सेकेण्ड रनरअप

ग्रूमिंग के दौरान नर्वस हो जानेवाली अल्का सिंह ऐसे बनीं 'स्रिया मिस इण्डिया 2017' की सेकेण्ड रनरअप
  उसके पास हुनरवाले पंख थें लेकिन उसे उड़ने के लिए मुकम्मल आसमान नहीं मिल रहा था. लेकिन एक दिन धुंध के बादल छटें तो उसे सफलता का नीला आसमान नज़र आ गया. फिर क्या था वह...
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मैं बिना दहेज़ के एक आईएएस बेटे की बहू बनी थी : डॉ. पूर्णिमा शेखर सिंह, प्रोफेसर एवं एचओडी (ज्योग्राफी डिपार्टमेंट), ए.एन.कॉलेज, पटना

मैं बिना दहेज़ के एक आईएएस बेटे की बहू बनी थी : डॉ. पूर्णिमा शेखर सिंह, प्रोफेसर एवं एचओडी (ज्योग्राफी डिपार्टमेंट), ए.एन.कॉलेज, पटना
मेरा मायका पटना तो ससुराल विद्यापति नगर के पास चमथा गांव में है. ऐसे देखा जाये तो हमारा ससुराल बेगूसराय है लेकिन वो गाँव चार जिलों का बॉर्डर छूता हुआ है. हम 5 भाई-बहन हैं...
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