'नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल (NLF) 2025' : जब हम अपनी बोलियों के साथ पर्दे पर आते हैं तो संवाद नहीं, पूरा जीवन बोलता है - मनोज भावुक 

''जब हम अपनी बोलियों के साथ पर्दे पर आते हैं तो संवाद नहीं, पूरा जीवन बोलता है। 'Words to Screen' की...

गीतकार समीर अनजान ने मुंबई इवेंट में आज़ाद भारत का टाइटल सॉन्ग लॉन्च किया

22 दिसंबर 2025, मुंबई: मशहूर गीतकार समीर अनजान ने मुंबई में आयोजित एक खास सॉन्ग लॉन्च इवेंट में आने...

गोवा के नाइट क्लब में लगी आग ने 25 लोगों की जान ले ली, वहीं 6 लोग घायल बताए जा रहे हैं। इनमें पांच प...

सोशल मीडिया का दुरुपयोग करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई

21वीं सदी का समाज सूचना-क्रांति के युग में प्रवेश कर चुका है। आज सोशल मीडिया केवल संवाद का साधन भर न...

इंटरनेशनल स्कॉलर्स स्कूल, नयागांव, सारण में INVENTICA 2025 वार्षिक विज्ञान प्रदर्शनी का सफल आयोजन

27 नवंबर 2025 को इंटरनेशनल स्कॉलर्स स्कूल, नयागांव, सारण में इन्वेंटिका 2025 - विज्ञान प्रदर्शनी में...

भारत में नये लेबर कोड: श्रमिक अधिकारों का नया अध्याय

केंद्र सरकार ने 21 नवंबर 2025 शुक्रवार को कार्य परिस्थितियों में बड़े बदलाव का कदम उठाते हुए देश में...

डॉ. शहनाज फातमी के साहित्यिक परिचर्चा में गूंजा ‘आयाम’ का स्त्री स्वर

डॉ. शहनाज फातमी के साहित्यिक परिचर्चा में गूंजा 'आयाम' का स्त्री स्वर
पटना, 27 अक्टूबर, आई.आई.बी.एम. सभागार में साहित्यिक संस्था “आयाम – साहित्य का स्त्री स्वर” द्वारा हिन्दी और उर्दू की प्रसिद्ध साहित्यकार डा. शहनाज फातमी...
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दूसरों पर आश्रित ना होना पड़े इसलिए दिव्यांग होते हुए भी मैंने घर की दहलीज लाँघी : ऋतु चौबे, फाइनांस एक्जक्यूटिव, कलाहनु ग्रुप ऑफ़ कम्पनीज,पटना

दूसरों पर आश्रित ना होना पड़े इसलिए दिव्यांग होते हुए भी मैंने घर की दहलीज लाँघी : ऋतु चौबे, फाइनांस एक्जक्यूटिव, कलाहनु ग्रुप ऑफ़ कम्पनीज,पटना
मेरे मायके में भी लड़कियों को बोझ समझे जाने की मानसिकता चरम पर थी. इतनी कि जब तीसरी बेटी के रूप में मेरा जन्म हुआ मेरे डॉक्टर पिता डिप्रेशन में आकर रो पड़े थें और दादा ने ग...
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तब एहसास हुआ कि पापा मुझे कितना प्यार करते हैं : दिव्या सिंह

तब एहसास हुआ कि पापा मुझे कितना प्यार करते हैं : दिव्या सिंह
“घर से दूर नया ठिकाना  अब यही खुशियों का आशियाना, वो दोस्तों के संग हुल्लड़पन  वो नटखट सा मेरा बचपन, हाँ अपनी यादें समेटकर  गलियों की खुशबू बटोरकर  दुनिया को दिखाने अपना ह...
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मैथिली फिल्मों के लिए ‘अच्छे दिन’ लाने वाली है फिल्म ‘‘प्रेमक बसात’’

मैथिली फिल्मों के लिए 'अच्छे दिन' लाने वाली है फिल्म ‘‘प्रेमक बसात’’
पटना, 15 अक्टूबर, “देश में अच्छे दिन आये कि नहीं, इसका तो ठीक से नहीं पता पर ‘प्रेमक बसात’ आने के बाद मैथिली फिल्मों के अच्छे दिन ज़रुर आ जायेंगे.”...
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पापा के गुजरने के बाद घर का बेटा बनकर जिम्मेदारियां निभानी पड़ीं : सोनी कच्छप, महिला ट्रैफिक कॉन्स्टेबल

पापा के गुजरने के बाद घर का बेटा बनकर जिम्मेदारियां निभानी पड़ीं : सोनी कच्छप, महिला ट्रैफिक कॉन्स्टेबल
मैं रांची, झाड़खंड की रहनेवाली हूँ. बतौर ट्रैफिक कॉन्स्टेबल मेरी ड्यूटी अभी पटना के कोतवाली चौक पर है. हम चार बहने हैं. सबसे बड़ी मैं हूँ. मेरी नौकरी पापा की जगह अनुकम्पा प...
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