गम की दहलीज पर नम हुई आँखें मगर आसुंओ को छुपा लेना ही तो है ज़िन्दगी दर्द के एह्साह पर थम गयी साँसें मगर मुस्कुरा के बढ़ जाना ही तो है ज़िन्दगी….. यूँ तो इनका न...
मुजफ्फरपुर(बिहार),नेउरा खानेजादपुर में मो.तस्लीम और शाहिदा खातून की बेटियां सादिया व आफरीन ने अपने गांव और आस पास के गाँव में ‘कोई बच्ची न मिले कूड़ेदा...
मेरा जन्म उतर प्रदेश, मथुरा के एक छोटे से कस्बे गोवर्धन में हुआ था. आगे की शिक्षा के लिए मैं बरेली चला आया जहाँ मेरे पिता जी का प्रिंटिंग प्रेस था. इंटरमीडिएट करने के बाद...
मेरा जन्म यू.पी. के वृन्दावन में हुआ था, बचपन से ही नाटक करने का बहुत शौक था मगर घर में इसकी इज़ाज़त नहीं थी. फिर मेरी 17 साल की छोटी उम्र में शादी हो गयी और मैं तब...