कविता - सब कुछ' पाना है मकसद...!

खोज़ते हर कोई किसी न किसी तरह की ख़ुशी, इस बेचैन संसार में मिल जाए सुकून और हँसी। हममें से अधिकांशजन ख...

शिमला में फोटोग्राफी कला में युवा फोटोग्राफर संजय कुमार प्रजापत हुए सम्मानित

मध्यप्रदेश के युवा फोटोग्राफर संजय कुमार प्रजापत ने राष्ट्रीय स्तर पर एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोह...

विवेकानंद जयंती (युवा दिवस) विशेष - स्वामी विवेकानंद : भारतीय संस्कृति के शिखर और युवाओं के प्रेरणास्रोत

स्वामी विवेकानंद भारतीय संस्कृति के एक ऐसे शिखर हैं, जिनकी चमक आज भी पूरे विश्व को रोशन कर रही है। व...

'नालंदा लिटरेचर फेस्टिवल (NLF) 2025' : जब हम अपनी बोलियों के साथ पर्दे पर आते हैं तो संवाद नहीं, पूरा जीवन बोलता है - मनोज भावुक 

''जब हम अपनी बोलियों के साथ पर्दे पर आते हैं तो संवाद नहीं, पूरा जीवन बोलता है। 'Words to Screen' की...

गीतकार समीर अनजान ने मुंबई इवेंट में आज़ाद भारत का टाइटल सॉन्ग लॉन्च किया

22 दिसंबर 2025, मुंबई: मशहूर गीतकार समीर अनजान ने मुंबई में आयोजित एक खास सॉन्ग लॉन्च इवेंट में आने...

गोवा के नाइट क्लब में लगी आग ने 25 लोगों की जान ले ली, वहीं 6 लोग घायल बताए जा रहे हैं। इनमें पांच प...

कॉन्फिडेंस नहीं था कि मैं टीवी में आऊं लेकिन मेरे गुरु का मुझपर बहुत भरोसा था : रतन राजपूत,अभिनेत्री

वो संघर्षमय दिन By: Rakesh Singh ‘Sonu’ पटना के मगध महिला से कॉलेज की पढ़ाई पूरी की… पढाई में मन नहीं लगता था.. क्या करना है ये ग्रेजुएशन तक मुझे नह...
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मर्दानगी (लेखक : राकेश सिंह ‘सोनू’)

लघु कथा मोहल्ले में गोलियां चलीं, रातभर दुबके रहें सभी. बचाओ-बचाओ की आवाजें आईं, लोग सुनकर भी अनसुना कर गए. सुबह होते ही सभी पहुंचे उस लुट चुके को सांत्वना देने. ...
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मौका (लेखक : राकेश सिंह ‘सोनू’)

लघु कथा     बहुत दिनों बाद एक पुराने मित्र को याद आई मेरी तो वह मिलने चला आया. मैं और वो छत पर टहलने लगें. वह बातें मुझसे कर रहा था मगर नज़र थी पास वाले छत पर जह...
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तब 100-150 रूपए की साइकिल भी मैंने ऑफिस से एडवांस लेकर खरीदी थी : स्व.रामाशीष सिंह, भूतपूर्व अवर सचिव, बिहार लोक सेवा आयोग

तब 100-150 रूपए की साइकिल भी मैंने ऑफिस से एडवांस लेकर खरीदी थी : स्व.रामाशीष सिंह, भूतपूर्व अवर सचिव, बिहार लोक सेवा आयोग
भोजपुर जिले के आरा शहर से ग्रेजुएशन करने के दरम्यान हमारे साथ के कुछ एक लड़के अपने अभिभावकों से कभी कभार कुछ पैसे माँगा लिया करते थे, लेकिन तब हमारे समय में पॉकेटमनी का फै...
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