13 अप्रैल : खालसा सृजन दिवस सांझीवालता का प्रतीक बैसाखी का त्योहार

13 अप्रैल : खालसा सृजन दिवस सांझीवालता का प्रतीक बैसाखी का त्योहार

भारत देश में बैसाखी का पवित्र त्यौहार धूम धाम एंव श्रद्धा भाव से मनाया जाता है। यह त्योहार अप्रैल माह के मध्य में मनाया जाता है। भारत में ही नहीं विदेशों में भी यह त्यौहार धूम धाम से संपन्न होता है। विदेशों में यहां भी भारतीय रहते हैं इस त्यौहार को दीर्घ मेले के रूप में हर्ष के साथ मनाते हैं। सभी धर्मों के लोग मिलजुल कर यह त्यौहार मनाते हैं। भारत कृषि प्रदान देश है। वैशाखी का त्यौहार किसान जिमीदार ढोल ढमक्के से, भांगड़े, गिद्धे से, रिश्तों की मिठास में मनाते हैं। फसलें पक कर तैयार हो जाती हैं। सोने की चमक सी गेहूं की फसल पक कर अपने यौवन की दास्तां कहती हुई किसान को माला माल करती है। फसलें हंसती हुई झूमती हैं और उन्नति का संदेश देती हैं। फूल अपनी सुरभियों से, फिज़ा में जन्नत की बात करते हें। आम के वृक्षों पर बूर खुशहाली का भविष्य छोड़ता है। लह लहाते खेतों में सरसों पीले पीले सुन्दर फूलों में दुल्हन सी लगती है। चारों ओर बहार ही बहार। पतझड़ मुंह छुपाकर भाग जाती है। वैशाखी वाले दिन खुशियां आसमान को छुहती हैं। घरों में तरह-तरह के मिष्ठान-व्यंजन पकते हैं। मेहमानों की आमद रिश्तों में शहद सी मीठास छोड़ती है।

प्राचीन इतिहास गवाही भरता है कि देवतों तथा मानवों ने मिलकर समुन्दर मंथन किया। शिव भगवान ने अमृत देवतों को दे दिया, पिला दिया। जो भी अमृत पीएगा वह अमर हो जाएगा। दानवों को बुरा पानी दे दिया गया। प्राचीन इतिहास गवाही भरता है कि देवतों तथा मानवों मिल कर समन्दर मंथन किया। शिव भगवान ने अर्मत देवतों को दे दिया, जो भी अमृत पीएगा वह अमर हो जाएगा। दानवों को बुरा पानी दे दिया गया। मुस्लमान आवे-हयात -यह जो भी अमृत पीएगा वह अमर हो जाएगा।

श्री गुरू नानक देव ज ने तथा अन्य सभी गुरूओं ने सतनाम का अमृत बंटा। आज का दिन सिक्ख इतिहास में गौरवता से मान प्रतिष्ठता से लिया जाता है। आज के दि नही श्री गुरू गोबिंद सिंह जी ने बैसाखी बादे दिन ( बैसाख माह) 1699 को तख्त श्री केसगढ़ साहिब श्री आनंदपुर साहिब में पांच ईलाही अमृत मई बाणियों के पाठ कर के खण्डे बाटे का अमृत तैयार किया और अलग अलग धर्मों, जातियों, स्थानों के पांच श्रद्धालुओं को सिंह सजा कर खालसा अकाल पुरूख की फौज का निर्माण किया। कौम में एक नई शक्ति का आगमन किया। दस्तार, केस और पांच ककों (क) अस्तित्व उत्पन्न किया और खालसा पंथ की नींव रख दी।

शुद्ध तथा सच्चे निर्भीक खालसा मानव की सृजना की वे पांच प्यारे थे भाई दया सिंह जी, भाई धर्म सिंह जी, भाई हिम्मत सिंह जी, भाई साहिब सिंह जी, भाई मोहकम सिंह जी। इन में सांझी वालता का अस्तित्व उत्पन्न किया। बादशाह दरवेस गुरू गोबिंद सिंह जी ने धर्म निष्पक्षता, लोक राज्य, समानता (समता) तथा समाजवाद के साथ चलने का यथार्थ रूप में उपदेश दिया। गुरू जी ने अपना सारा परिवार माता पिता सहित देश की खातिर कुर्वान कर दिया और दुनियां में इन्सानियत की ज्योति प्रज्वलित कर दिखाई। उनके पिता श्री गुरू तेग बहादुर जी ने कश्मीरी पण्डितों के लिए कुर्बानी दी। उनकी प्रज्वल की हुई यह ज्योति सूर्य की भांति चमकती रहेगी।

13 अप्रैल बैसाखी वाले दिन 1919 को ही जल्लेआं वाले बाग अमृतसर में माईकल अडवायर तथा जनरल डायर की सैना ने शांतमाई रैली करते लोगों पर अंधा धुंध गोलियां दागी, अनेक लोग शहीद हुए। डाक्टर सैफूदीन किचलू तथा डाकटर सतपाल की गिरफ्तारी का विरोध कर रहे लोगों पर गोलियां चला कर अंग्रेज सरकार ने अनेक भारतीयों को शहीद किया। यह दिन हक-सच्च के लिए जुझने की हकीकत
बताता रहेगा। दमदमा साहिब तलवंडी साबों में बैसाखी का मेला धूम धडके से मनाया जाता है। आज के दिन हजारों-लाखों लोग अमृत बाटे का अम्रत पान कर के इस दिन की पवित्रता को जींवन रखते है।
बैसाखी गंगा-सागर बंगाल में भी धूम-धाम से मनाई जाती है। हिमाचल प्रदेश के प्रसिद्ध शहर डलहोजी के करीब वनीखेत के प्रसिद्ध मन्दिर श्री भुरू नाग देवता में भी धूम धाम एंव श्रदा से मनाई जाती है। इस दिन सूर्या उच्च राशियों में प्रवेश करता है जो शुभ माना जाता है। इस दिन माधव-मास का बड़ा महत्व है क्योंकि प्रकृति का आनंद होता है।

बैसाखी का त्यौहार सिक्खों के महान सच्च खण्ड पवित्र स्थान श्री हरिमन्दिर साहिब में इन्टरनैशनल स्तर पर मनाया जाता है। श्रद्धालु देश-विदेश से उपस्थिति भरते हैं। यहां गुरूयों की वाणी का अमृत बरसता है। लोंग सुख-हर्ष-आनंद प्राप्त करते हैं।प्रसिद्ध कवि धनि राम पात्रिक का एक शेअर है। कणकां दी मुक गई राखी, ओ जट्टा आई बैसाखी।

  • बलविंदर बालम
    ओंकार, गुरदासपुर, पंजाब

About The Author

'Bolo Zindagi' s Founder & Editor Rakesh Singh 'Sonu' is Reporter, Researcher, Poet, Lyricist & Story writer. He is author of three books namely Sixer Lalu Yadav Ke (Comedy Collection), Tumhen Soche Bina Nind Aaye Toh Kaise? (Song, Poem, Shayari Collection) & Ek Juda Sa Ladka (Novel). He worked with Dainik Hindustan, Dainik Jagran, Rashtriya Sahara (Patna), Delhi Press Bhawan Magazines, Bhojpuri City as a freelance reporter & writer. He worked as a Assistant Producer at E24 (Mumbai-Delhi).

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