‘हनुमान अंश’ की टीम की अनोखी कहानी : कैमरे के पीछे से बाबा के किरदार तक

‘हनुमान अंश’ की टीम की अनोखी कहानी : कैमरे के पीछे से बाबा के किरदार तक

नीम करोली बाबा के जीवन और आध्यात्मिक यात्रा पर बनी फिल्म ‘हनुमान अंश’ की सफलता की कहानी केवल बॉक्स ऑफिस तक सीमित नहीं है। इस फिल्म को बनाने वाली टीम के पीछे भी संघर्ष, संयोग, आस्था और मेहनत से भरी कई कहानियां हैं। फिल्म की सबसे दिलचस्प कहानी उसके मुख्य अभिनेता शोभिनव सत्या की है, जो इस फिल्म में अभिनेता बनने नहीं आए थे।

असिस्टेंट डायरेक्टर से बने नीम करोली बाबा

लखनऊ से आने वाले शोभिनव सत्या ने FTII, पुणे से अभिनय की शिक्षा ली है और मनोरंजन उद्योग में वर्षों तक कैमरे के पीछे तथा अलग-अलग प्रोजेक्ट्स में काम किया। ‘हनुमान अंश’ के सेट पर भी वह शुरुआत में सेकंड असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम कर रहे थे। उन्हें प्रोडक्शन और सेट से जुड़े कामों की जिम्मेदारी संभालनी थी।

फिल्म में नीम करोली बाबा की भूमिका के लिए पहले दूसरे अभिनेता का चयन किया गया था, लेकिन शूटिंग शुरू होने के समय उनकी तबीयत खराब हो गई। ऐसे में निर्देशक विशाल चतुर्वेदी के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। इसी दौरान उनकी नजर शोभिनव पर गई। उनका स्क्रीन टेस्ट कराया गया, जो लगभग पांच घंटे चला। टेस्ट के बाद उन्हें नीम करोली बाबा की भूमिका के लिए चुन लिया गया। इस तरह जो व्यक्ति कैमरे के पीछे फिल्म बनाने में सहयोग कर रहा था, वही अचानक फिल्म का मुख्य चेहरा बन गया।

शोभिनव के लिए यह भूमिका केवल अभिनय नहीं थी। उन्होंने मीडिया से बातचीत में बताया कि शुरुआत में उन्हें यह किरदार निभाने को लेकर डर भी था। वह चाहते थे कि बाबा जैसे पूजनीय व्यक्तित्व की भूमिका को पूरी संवेदनशीलता के साथ निभाया जाए। शूटिंग के दौरान उनका लुक इतना प्रभावशाली हो गया कि कुछ ग्रामीण उन्हें वास्तविक बाबा समझने लगे और उनसे आशीर्वाद लेने लगे।

शूटिंग के दौरान एक और दिलचस्प घटना सामने आई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, एक दिन लगभग तीन घंटे तक कैमरा ठीक से नहीं चल पाया। इसके बाद टीम ने पूजा की और हनुमान चालीसा का पाठ किया। पाठ पूरा होने के आसपास शूटिंग की समस्या दूर हुई और कैमरा चल पड़ा। टीम ने इस अनुभव को आस्था से जुड़ा विशेष क्षण माना।

शोभिनव ने यह भी बताया कि शूटिंग के दौरान वह एक मंदिर में रुके और ग्रामीणों के साथ सादा भोजन किया। गांव के लोगों के बीच रहना और उनके जीवन को करीब से देखना उनके लिए भूमिका को समझने का महत्वपूर्ण अनुभव बना।

पूर्णिमा तिवारी और रामबेटी का किरदार

फिल्म में पूर्णिमा तिवारी ने नीम करोली बाबा की पत्नी रामबेटी शर्मा की भूमिका निभाई है। उनका किरदार बाबा के आध्यात्मिक जीवन के साथ-साथ उनके पारिवारिक और भावनात्मक पक्ष को सामने लाता है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शोभिनव के बाबा वाले रूप को पहली बार देखने का अनुभव पूर्णिमा के लिए भी भावुक करने वाला था। एक महत्वपूर्ण दृश्य में उनके संवाद कम थे, लेकिन उनके अभिनय ने पूरे दृश्य को प्रभावशाली बना दिया।

विशाल चतुर्वेदी: शोध से सिनेमा तक

फिल्म के लेखक और निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने नीम करोली बाबा के जीवन पर लंबे समय तक अध्ययन और शोध किया। फिल्म उनकी पुस्तक ‘Divine Detour’ पर आधारित बताई गई है। चतुर्वेदी ने बड़े सितारों के बजाय नए चेहरों के साथ फिल्म बनाने का फैसला किया। उनका मानना था कि कहानी और किरदारों की सच्चाई को प्राथमिकता देना अधिक महत्वपूर्ण है।

फिल्म के लिए उन्होंने खुद भी काफी अनुशासन अपनाया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने लगभग साढ़े चार महीने तक फलाहार किया और रोज हनुमान चालीसा का पाठ किया। सेट पर शाकाहारी भोजन रखने की बात भी सामने आई है।

21 साल की अनुप्रिया नागर की कहानी

‘हनुमान अंश’ की कहानी में अनुप्रिया नागर का सफर भी बेहद अनोखा है। यूनिवर्सिटी ऑफ बाथ में अर्थशास्त्र की पढ़ाई के दौरान एक असाइनमेंट के लिए उन्होंने स्टीव जॉब्स पर शोध किया। इसी शोध के दौरान उनकी रुचि जॉब्स और नीम करोली बाबा के बीच बताए जाने वाले आध्यात्मिक संबंध की ओर बढ़ी। लगभग एक वर्ष की रिसर्च के बाद यह रुचि फिल्म की दिशा में बदल गई।

अनुप्रिया ने फिल्म निर्माण में कदम रखा और रिपोर्टों के अनुसार अपनी बचत तक इस परियोजना में लगाई। वह अकेली नहीं थीं; रागिनी एस. और नम्रता जी. सिंह भी फिल्म की प्रोड्यूसर टीम का हिस्सा हैं।

इस तरह ‘हनुमान अंश’ केवल नीम करोली बाबा की कहानी नहीं, बल्कि उन लोगों की भी कहानी बन गई जिन्होंने सीमित संसाधनों के बावजूद विश्वास, शोध और मेहनत के साथ एक बड़े सपने को पर्दे पर उतार दिया। शोभिनव का कैमरे के पीछे से बाबा के किरदार तक पहुंचना, पूर्णिमा का रामबेटी बनना, विशाल चतुर्वेदी का वर्षों का शोध और अनुप्रिया नागर का विश्वविद्यालय के असाइनमेंट से फिल्म निर्माण तक पहुंचना—इन सभी कहानियों ने ‘हनुमान अंश’ को पर्दे के पीछे भी उतना ही रोचक बना दिया है जितनी उसकी कहानी पर्दे पर दिखाई देती है।

 

नीम करोली बाबा: भक्ति, सेवा और दुनिया को प्रभावित करने वाली एक आध्यात्मिक यात्रा

भारत की आध्यात्मिक परंपरा में अनेक ऐसे संत हुए हैं, जिनका प्रभाव देश की सीमाओं से निकलकर पूरी दुनिया तक पहुँचा। नीम करोली बाबा, जिन्हें उनके अनुयायी प्रेम से महाराज जी कहते हैं, ऐसे ही संतों में शामिल हैं। उत्तराखंड के नैनीताल जिले के पास स्थित कैंची धाम आज उनके भक्तों के लिए एक प्रमुख आध्यात्मिक केंद्र है। बाबा की शिक्षाओं में प्रेम, सेवा, भक्ति और मानवता को विशेष स्थान प्राप्त था। भगवान हनुमान के प्रति उनकी गहरी आस्था के कारण उनके अनुयायी उन्हें हनुमान भक्ति की महान परंपरा से जोड़कर देखते हैं।

 

नीम करोली बाबा का प्रभाव केवल सामान्य श्रद्धालुओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि देश-विदेश की कई प्रसिद्ध हस्तियों ने भी उनके विचारों और कैंची धाम के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा का नाम भी कैंची धाम और नीम करोली बाबा से जुड़ी चर्चाओं में सामने आता रहा है। क्रिकेटर रिंकू सिंह सहित अन्य लोगों के भी कैंची धाम जाने की खबरें सामने आई हैं। हालांकि किसी व्यक्ति को बाबा का भक्त बताने से पहले उपलब्ध प्रमाणों को देखना आवश्यक है।

नीम करोली बाबा की लोकप्रियता भारत से बाहर भी पहुँची। दुनिया के प्रसिद्ध तकनीकी उद्यमी स्टीव जॉब्स का नाम बाबा से जुड़ी सबसे चर्चित कहानियों में आता है। भारत की आध्यात्मिक यात्रा के दौरान जॉब्स कैंची धाम से प्रभावित हुए थे। बाद में उन्होंने अपने परिचित मार्क जुकरबर्ग को भी भारत आने की सलाह दी थी। मार्क जुकरबर्ग के कैंची धाम आने की कहानी भी लंबे समय से चर्चा में रही है। हॉलीवुड अभिनेत्री जूलिया रॉबर्ट्स का नाम भी नीम करोली बाबा से प्रभावित विदेशी हस्तियों में लिया जाता है।

इसी आध्यात्मिक विरासत को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करने के लिए हनुमान अंश’ फिल्म चर्चा में आई है। फिल्म में शोभिनव सत्या नीम करोली बाबा की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि पूर्णिमा तिवारी बाबा की पत्नी रामबेटी शर्मा की भूमिका में हैं। फिल्म के लेखक-निर्देशक विशाल चतुर्वेदी हैं। फिल्म से जुड़े अन्य कलाकारों में विहान एस. हेगड़े, चंदन आनंद, अनिल के. रस्तोगी और गुलशन पांडे शामिल हैं। फिल्म की निर्माता अनुप्रिया नागर हैं, जिनकी शोध-यात्रा भी इस परियोजना की प्रेरणा से जुड़ी बताई गई है।

नीम करोली बाबा की सबसे बड़ी विशेषता यही रही कि उनकी शिक्षाओं का केंद्र किसी एक वर्ग, देश या समुदाय तक सीमित नहीं था। उनका संदेश प्रेम, सेवा और मानवता पर आधारित था। यही कारण है कि भारत के सामान्य श्रद्धालुओं से लेकर दुनिया के प्रसिद्ध उद्यमियों और कलाकारों तक, अनेक लोग उनकी आध्यात्मिक विरासत से प्रभावित हुए।

कैंची धाम आज भी इस विरासत का प्रमुख केंद्र है और हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुँचते हैं। नीम करोली बाबा की कहानी यह बताती है कि सच्ची आध्यात्मिकता सीमाओं से परे जाकर मनुष्य के जीवन को प्रभावित कर सकती है।

प्रस्तुति : धीरज कश्यप

 

About The Author

'Bolo Zindagi' s Founder & Editor Rakesh Singh 'Sonu' is Reporter, Researcher, Poet, Lyricist & Story writer. He is author of three books namely Sixer Lalu Yadav Ke (Comedy Collection), Tumhen Soche Bina Nind Aaye Toh Kaise? (Song, Poem, Shayari Collection) & Ek Juda Sa Ladka (Novel). He worked with Dainik Hindustan, Dainik Jagran, Rashtriya Sahara (Patna), Delhi Press Bhawan Magazines, Bhojpuri City as a freelance reporter & writer. He worked as a Assistant Producer at E24 (Mumbai-Delhi).

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *