सिर्फ अपनी बहन की रक्षा क्यों ?

सिर्फ अपनी बहन की रक्षा क्यों ?

“बंधवा लो राखी, खा लो मिठाई और
तोहफे में भइया ये वचन तुम हमें देना,
जैसे करते हो मेरी इज्जत वैसे ही
गैर लड़कियों को भी रिसपेक्ट तुम देना.
तुम्हारे इस तोहफे से देखना भइया
लाखों बहनों की जिंदगी संवर जाएगी,
फिर मेरी रक्षा की तुम्हारी फ़िक्र
तो खुद-ब-खुद दूर हो जाएगी.”

हर भाई रक्षाबंधन के दिन अपनी बहन की रक्षा करने का प्रण लेता है. पर सवाल उठता है कि वो सिर्फ अपनी बहन की रक्षा करने का प्रण क्यों लेता है? क्या वह गैर लड़कियों को अपने बहन जैसी इज्जत नहीं दे सकता? माना कि लड़के सभी लड़कियों को अपनी बहन नहीं बनाना चाहते. लेकिन एक बहन के भाई होने के नाते क्या उनका फर्ज नहीं बनता कि वो गैर लड़कियों को बुरी नज़र से ना देखे? क्यों वे भूल जाते हैं कि जैसा बुरा सलूक वो गैर लड़कियों के साथ करते हैं वैसा ही सलूक कभी कोई उनकी बहन के साथ भी कर सकता है. ऐसे में क्या तमाम बहनों को अपने भाइयों से ना सिर्फ अपनी बल्कि समाज की हर लड़कियों-महिलाओं की मान-मर्यादा बनाये रखने का प्रण नहीं लिया जाना चाहिए? इन्ही सवालों के साथ हमने कुछ लड़कियों से बात की और जानना चाहा कि वे इस पहल को लेकर क्या सोचती हैं व कितनी सहमत हैं.

अपराधी प्रवृति के भाइयों का बहिष्कार करें बहनें

वैशाली की रहनेवाली व डी.आर.सी.सी. में जॉब कर रहीं कुमारी अंशिका का कहना है : हर बहन को हर भाई से ये कमिटमेंट कराना चाहिए कि वो गैर बहनों के इज्जत से कभी खिलवाड़ नहीं करेगा. लड़के पलभर की मस्ती समझकर भले ही मजाक में लड़कियों से छेड़छाड़ कर देते हैं. लेकिन वे यह नहीं सोचते कि इसका असर उस लड़की पर क्या पड़ेगा? वे यह भी भूल जाते हैं कि वह भी किसी की बहन है. अगर उनकी बहन के साथ कोई छेड़खानी कर दे तो वे आपे से बाहर हो जायेंगे, क्यों ? आज तो मुंहबोले भाई और मुंबोली बहनों का कॉन्सेप्ट भी बहुत चलन में है. लेकिन आज के हालात को देखते हुए जल्दी किसी पर भरोसा नहीं किया जा सकता. मैं कहना चाहूंगी कि जो भाई अपराधी प्रवृति के हैं, जो बलात्कार जैसे जघन्य अपराध में शामिल हैं, वैसे भाइयों का तो खुद उनकी बहनों द्वारा बहिष्कार कर देना चाहिए. राखी बंधवाने का हक़ भी उनसे छीन लेना चाहिए.

 

 

 

गैर धर्म की लड़कियों की रक्षा भी करनी चाहिए

बी.एस.कॉलेज, दानापुर में बी.सी.इ फर्स्ट ईयर की स्टूडेंट अंजलि कहती हैं : रक्षा बंधन में हर एक बहन अपने भाई को राखी बांधती है और भाई बहुत सारी कसमे खाते हैं कि मैं अपनी बहन की रक्षा करूँगा, बहन के लिए ये करूँगा वो करूँगा…. लेकिन ये बात बहुत गलत है कि वे सिर्फ अपनी बहन की रक्षा के लिए प्रण करते हैं ना कि दूसरे की बहनों के लिए. गैर की बहनों को आजकल के लड़के गन्दी निगाह से देखते हैं. अगर आज के लड़के हरेक लड़की को अपने घर की ही इज्जत समझेंगे तो आज जो महिलाओं-लड़कियों के साथ आये दिन दुष्ट कर्म हो रहे हैं वो होंगे ही नहीं. कई बार ये देखने में आता है कि गैर धर्म की लड़की को बाहर अकेली पाकर कुछ बुरा होता है तो देखकर भी लोग ये सोचते हैं कि ये हमारी बिरादरी की थोड़े ना है और वे आँखें बंद कर लेते हैं, उन्हें नहीं रोकते हैं. तो ये भावना भी बहुत गलत है. उन्हें दूसरे धर्म की लड़कियों को भी अपनी बहन जैसी इज्जत देनी चाहिए. उसकी रक्षा के लिए भी आगे आना चाहिए.

 

 

 

 

माहौल तो लड़कों ने ही खराब कर रखा है

प्रशस्ति प्रियदर्शी : मैं पूरी तरह इस बात से सहमत हूँ और ऐसा ही होना चाहिए. आज के समाज में हरेक क्षेत्र में लड़का-लड़की बराबर हैं, लेकिन जब नाइट शिफ्ट में ड्यूटी या देर रात को ड्यूटी से घर लौटने की बात आती है तो वहां दोनों में फर्क महसूस होने लगता है. सब कहते हैं कि मुंबई जैसे बड़े शहरों में लड़कियों के लिए माहौल बहुत अच्छा है. वहां लड़कियां देर रात को भी बेख़ौफ़ अकेली आ-जा सकती है, जो पहनना है वो पहन सकती हैं. लेकिन ऐसा अपने राज्य में नहीं है. क्यों है यहाँ भय ? यह भय लड़कों की वजह से ही तो है. माहौल अच्छा बनाने के लिए मैं भी चाहूंगी कि जैसे मेरा भाई मुझे मानता है – इज्जत देता है वैसे ही सबको दे.

 

 

 

भाई पहले घर में बहनों को सम्मान दिलवाएं
एल.एल.बी. कर चुकीं कनिका मिश्रा कहती हैं : हर भाई अपनी बहन के आलावा दूसरों की फ़िक्र करता है या नहीं ये तो कहना मुश्किल है लेकिन जब हर भाई यह प्रण लेने लगे कि वो गैर लड़कियों को भी सम्मान की नज़र से देखेगा तो यह बड़ी बात होगी. लेकिन मैं यहाँ कहना चाहूंगी कि वो सिर्फ यही प्रण क्यों ले? क्या इसके साथ-साथ उसे अपने ही घर में बहनों को उनका हर मान-सम्मान दिलाने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. कितने ही घरों में आज भी घर की बेटियों-बहनों को पूरा हक़ नहीं मिलता. वे अपना निर्णय खुद लें इसकी भी आजादी नहीं मिलती. और कितने ही घरों में तो आज भी बेटियों को बस नौकरानी की तरह समझा जाता है. तो ऐसे में उनकी हालत में सुधार लाने का प्रयत्न भी तो भाई को करनी चाहिए.

 

अपनी दोस्तों से भी यह पहल करवाएंगे

बी.कॉम. कर चुकीं श्वेता सिंह कि नज़र में : लड़के सभी गैर लड़कियों को बहन माने ये जरुरी नहीं लेकिन लड़कियों को वे वाजिब इज्जत तो दे ही सकते हैं. यह भी जरुरी नहीं कि सभी भाई ऐसी कसम खा ही लें. लेकिन 50 प्रतिशत छोड़िये, 10 प्रतिशत भी अगर ऐसा हो जाये तो बेहतर है. क्यूंकि बून्द-बून्द से ही तो घड़ा भरता है. जैसा प्रण हम खुद अपने भाई से कराएँगे वैसा ही अपनी सारी फ्रेंड्स से बोलकर उनके भाइयों से भी करवाएंगे. जिससे समाज में एक चेन बनेगा और सुधार होगा. फिर तो हम बहनों की अपनी रक्षा खुद ही हो जाएगी.

 

छेड़खानी करनेवालों की बहनें भी सुरक्षित नहीं होतीं
अल्का कुमारी : मुझे समझ में नहीं आता कि रक्षाबंधन के दिन कुछ लड़के घरों में अपनी बहनों से राखी बंधवाते हैं. उसके सतीत्व की रक्षा का प्रण करते हैं और फिर अगले ही दिन वही सड़कों पर खड़े होकर आने-जानेवाली गैर लड़कियों पर भद्दे कमेंट कर उसकी इज्जत क्यों तार-तार कर देते हैं…? क्यों वे भूल जाते हैं कि कभी उनकी भी बहन किसी काम से अकेली बहार निकलेंगी, उनके साथ भी तो यही हादसा हो सकता है? कीचड़ में खड़ा रहनेवाला शख्स भला दूसरों पर कीचड़ डाले और खुद पाक-साफ रह जाये यह तो मुमकिन ही नहीं है. तो ऐसे में हर भाइयों को यह कसम खानी चाहिए कि वे गैर बहनों को अच्छी निगाह से देखेंगे तभी सभी बहनों की जिंदगी संवरेगी.

About The Author

Rakesh Singh Sonu

'Bolo Zindagi' s Founder & Editor Rakesh Singh 'Sonu' is Reporter, Researcher, Poet, Lyricist & Story writer. He is author of three books namely Sixer Lalu Yadav Ke (Comedy Collection), Tumhen Soche Bina Nind Aaye Toh Kaise? (Song, Poem, Shayari Collection) & Ek Juda Sa Ladka (Novel). He worked with Dainik Hindustan, Dainik Jagran, Rashtriya Sahara (Patna), Delhi Press Bhawan Magazines, Bhojpuri City as a freelance reporter & writer. He worked as a Assistant Producer at E24 (Mumbai-Delhi).

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