

देश के अनेक भागों में अधिक तापमान तेजी से बढ़ता जा रहा है। अब यह तापमान 44 डिग्री पार करने वाला है। इस तरह जल्द ही लू की चपेट पूरे देश में पाई जाएगी। पिछले वर्षों से लू का आलम बढ़ता हुआ देखा है । 2024 में औसतन 20 दिन लू चली। भारत जल्द ही उन देशों में होगा, जहां हिटवेव मानवीय सहनशक्ति की सीमा को पार कर जाएगी | इससे डिहाइड्रेशन और हीट स्ट्रोक तो होगा ही अधिक तापमान से वायरस, बैक्टीरिया और मच्छर, मक्खी जैसे वेक्टर तेजी से पनपेंगे जो भविष्य में नई महामारी को न्योता दे सकते हैं। ऐसी स्थिति में इससे बचना बहुत आवश्यक है।
गर्मी की तेज धूप और झुलसा देनेवाली गरम हवाओं को ‘लू’ कहा जाता है। ‘लू’ लगना ग्रीष्मकाल की बीमारी है। ‘लू’ गर्मी के प्रकोप के कारण फैलती है ,जब हवाएँ और गर्म हो जाती है। ये हवाएँ तेज और शुष्क होने के कारण वातावरण की नमी सोख लेती है। इसके कारण मनुष्य के शरीर में नमक और पानी का बड़ा हिस्सा शरीर से निकलता तो खून की गरमी बढ़ने लगती है। इसके कारण प्यास बहुत अधिक लगती और सिर में भारीपन मालूम होने लगता है। गर्मी बढ़ने से तन शिथिल हो जाता है व त्वचा झुलस जाती है। शारीरिक गर्मी बढ़ने से मनुष्य ‘लू’ की चपेट में आ जाता है | ‘लू’ लगने के कई कारण है। इसमें अधिक देर तक गर्म तेज हवा में घूमने-फिरने से, धूप में नंगे पावं चलने, शारीरिक रूप से कमजोरी, पौष्टिक आहार न लेना। ‘लू’ लगने की अवस्था में शरीर के अंदर तापमान को नियंत्रण में रखनेवाली प्रणालियाँ काम करना बंद कर देती है, जिससे शरीर के तापमान में वृद्धि होती है और यह तापमान बढ़कर 106 से 108 डिग्री सेल्सियस हो जाता है। इससे ज्वर की तीव्रता से सिर में दर्द, बैचेनी, चक्कर आना, आँखों में जलन, अचानक बेहोशी, नाड़ी की गति में तेजी, खून की गति में तेजी और शरीर में ऐंठन लगती है, कभी-कभी उल्टियाँ भी होती हैं तथा हाथ और पैर के तलुओं में जलन भी होती है।
दिल्ली के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. डी.के. शर्मा ने बताया कि गर्मी में पसीन के कारण अधिक पानी निकल जाने से ‘‘डिहाइड्रेशन’’ यानि शरीर में पानी की कमी हो जाती है। डॉ. शर्मा का कहना है कि पसीना निकलना शरीर के सही तापमान को बनाए रखने के लिए आवश्यक है, लेकिन समस्या तब होती है जब पसीना निकलने के अनुपात में शरीर में पानी की पूर्ति नहीं हो पाती है , जाहिर है कि पानी की कमी से शरीर का तापमान बढ़ने लगता है । इससे शारीरिक अंगों को नुकसान होने लगता है।
डॉ. यासिर रिजवी के मुताबिक सादा पानी हमारे शरीर के लिए उत्तम होता है। इसलिए धूप में बाहर निकलने से पहले पानी पी लें और अपने साथ हमेशा पानी की बोतल रखें। वैसे तो बाजार में ज्यूस और कई सपोर्ट ड्रिंक भी उपलब्ध होते है, लेकिन डॉ. रिजवी कहते है, कि इनका सेवन नहीं करना चाहिए, इनसे शरीर को फायदा नहीं होता। डॉ. एस.के. बोस के अनुसार धूप में निकलने से पहले सन स्क्रीन क्रीम लगाना लाभदायक होता है।
लू के घरेलू उपचार –
लू लगने पर तत्काल चिकित्सा उपलब्ध नहीं होने पर निम्न उपचार करना चाहिए —–
डाक्टर के आने तक तौलिया या चादर को पानी में भिगोंकर रोगी को ओढ़ा देना, पहने हुए वस्त्र को हल्के वस्त्र में बदल देना और थोड़ी-थोड़ी देर में चादर को बदलना चाहिए।
यदि बुखार 104 डिग्री से अधिक हो तो बर्फ की पट्टी सीर पर रखनी चाहिए। इसको बार-बार बदलते रहने से बुखार जल्दी से उतारने का प्रयास करना चाहिए।
लू लगे रोगी को प्याज के रस में शहद देकर चटाने के साथ प्याज के रस को पैरों के तलवे पर बार-बार रगड़ना चाहिए।
रोगी को कुछ खिलाएँ नहीं इससे उल्टी हो सकती है।
जौं का आटा व पीसा प्याज मिलाकर शरीर पर लेप करने से लू से तुरन्त आराम मिलता है। क्योंकि जो शीतलता प्रदान करता है व गर्मी दूर भगाता है।
कैरी का पना विशेष लाभदायक होता है। कच्ची कैरी गरम राख पर मंद आँच वाले अंगार में भुनकर, उस गुदा को पानी में मसलकर उसमें जीरा, धनियां, शक्कर,काली मिर्च डालकर पना पेय रोगी को पिलाना चाहिए | इसके साथ बाहर जाने के पहले इसका सेवन कर लू से बचा जा सकता है।
घर का वातावरण शीतल रखने का प्रयत्न करना चाहिए। सर्वप्रथम यह प्रयास करना आवश्यक है कि मरीज को ठंडे स्थान पर आराम करवाया जाए।
इन उपायों के साथ ही …. गरिष्ठ वस्तुओं को कुछ समय के लिए तिलांजलि दे दे तो अच्छा होगा। भोजन में खटाई, आम-इमली की चटनी, नींबू, पुदीना व जीरा के उपयोग की मात्रा बढ़ा देना चाहिए। मौसमी फलों का सेवन लाभदायक रहता है जैसे – अंगूर, संतरा, खरबूजा, तरबूज, आम, लीची, आलू बुखारा आदि। बे मौसमी फलों का सेवन हानिकारक हो सकता है।
लू से बचने के तरीके —
लू से बचने के लिये दोपहर के समय घर से बाहर नहीं निकलना चाहिए। अगर बाहर जाना आवश्यक हो तो सिर और गर्दन को तौलियां से ढक लेना आवश्यक है ,वैसे 12 बजे से 4 बजे तक के समय को टालना चाहिए।
सूरज की पराबैंगनी किरणों से बचाववाले चश्मे का उपयोग करना चाहिए। वैसे तो साधारण चश्मे का उपयोग भी किया जा सकता हैं।
पैंट की जेब में ताजा प्याज रख लेने से लू से बचा जा सकता है।
पसीने में तरबतर रहने पर भूल से जल्दबाजी में पानी नहीं पीना चाहिए।
धूप में बाहर जाने के पूर्व गर्मी से बचने के लिए हल्के नरम, मुलायम, सूती कपड़े और ढीले ढाले ही कपड़े पहनना चाहिए। जिससे हवा और शरीर के पसीने को कपड़े सोखते रहेंगे।
प्रातः काल नियमित स्नान किया जाए तो अच्छा है, इससे शरीर की त्वचा स्वस्थ, पसीने से त्वचा में जमी धूल की सफाई हो जाती है।
इस ऋतु में शरीर को पानी व नमक की बेहद जरूरत होती है। पानी की कमी से व्यक्ति को लू लगने की शत-प्रतिशत संभावना रहती है। अतः पानी खूब पीना चाहिए, प्यास ना लगने पर भी पानी पीना चाहिए | इसमें नींबू व नमक मिला लेना चाहिए। लीची व गुलाब का शरबत, पुदीने का पानी, लस्सी, गन्ने का रस, ताजे फलों का रस और ठंडाई पिए जा सकते हैं।
गर्मी के मौसम में चाय-काफी आदि गर्म वस्तुओं का सेवन कम करना है। इससे ‘लू’ की संभावना बढ़ती है।
पानी में बर्फ का प्रयोग नहीं करना चाहिए क्योंकि इसमें लाभ की अपेक्षा हानि हो सकती है। मिट्टी के घड़े या सुराही के पानी का प्रयोग करना लाभप्रद रहता है।
इस प्रकार खान-पान संबंधी थोड़ी-सी सावधानी से ‘लू’ लगने से बचा जा सकता है।