
यह तो हम सभी जानते हैं, कि रक्तदान से मरीज को जीवनदान मिल जाता है। किन्तु समय पर रक्त या खून न मिले तो मरीज की जान भी चली जाती है। अगर हर इंसान अपनी जिन्दगी में सिर्फ एक बार भी रक्तदान करे , तो अस्पतालों में शायद ही कभी खून की किल्लत होगी। न जाने हर वर्ष कितनी ही मौते खून के समय पर न मिलने या फिर एड्स अथवा हैपटाइटिस जैसी जानलेवा बीमारियो के विषाणुयुक्त रक्त मिलने के कारण असमय ही हो जाती है। दुर्घटनाग्रस्त रोगियों को अक्सर खून की जरूरत होती है। उसी प्रकार थैलेसीमिया, हीमोफिलिया, एनीमिया और रक्त कैंसर से ग्रसित लोगों को बराबर खून की जरूरत पड़ती है। शल्य चिकित्सा से गुजरने वाले व्यक्ति को भी आपरेशन के दौरान हुई रक्त की हानि को पूरा करने लिए खून लेना पड़ता है। इस तरह जिन मरीजों को रक्त की जरूरत होती है, उसकी आपूर्ति रक्तदान से संभव होती है। दूसरी ओर रक्तदान को लेकर काफी भ्रांतियां भी अवश्य होती है, उन्हें दूर भी किया गया था। 14 जून को विश्व रक्तदान दिवस मनाया जाता है।

5, जैन कालोनी, मन्दसौर, (म.प्र.) – 458001
स्मरण रहे शुरू में बहुत से देशों में जानवरों का खून मानव शरीर में पहुंचने का प्रचलन रहा, परन्तु जानवरों का रक्त-मनुष्य के लिए घातक व जानलेवा साबित हुआ , और उससे कई मौते इंसानों की हो चुकी है। इसे वर्ष 1678 में प्रतिबंधित कर दिया गया था । करीब 150 वर्ष के बाद लंदन के सेन्ट थामस अस्पताल में कार्यरत डाक्टर जेम्स वलंडेल सन् 1818 में खून चढ़ाने के यंत्र का आविष्कार किया। इसके परिणाम भी अच्छे नहीं रहे। सन् 1901 तक डॉक्टरों के लिए यह समस्या गंभीर रही। समस्या का हल युवा वैज्ञानिक कार्ल लैंड स्टेईनर ने किया। यह देखा गया, कि सभी मनुष्यों का रक्त एक जैसा नहीं होता। इस तरह चिकित्सा विज्ञान ने मुख्य रूप से यह देखा सभी मनुष्यों के रक्त चार तरह के रक्त समूह होते है। ए, बी, ओ व एबी । अब इससे यह फायदा हुआ , कि मरीज को उसी समूह का रक्त चढाया जाए , तो उसकी मृत्यु की आशंका कम रहेगी। वर्तमान में रक्त चढ़ाने में भी अनेकानेक बाधाओं को दूर किया गया। नवीन तकनीकी आधार पर काम किया जा रहा है ।
मानव रक्त का कोई विकल्प नहीं है । अतः स्वस्थ व्यक्ति द्वारा किया गया ,स्वैच्छिक रक्तदान ही रक्त की सतत् उपलब्धता का एकमात्र स्त्रोत है। यह कहना कोई अतिश्योति नहीं रक्तदान के द्वारा किसी एक व्यक्ति के जीवन की-रक्षा तो होती ही है , परन्तु यदि वह व्यक्ति अपने परिवार का एक मात्र कमाने वाला मुखिया है, तो उसके जीवन को बचाकर हम पूरे परिवार का भरपोषण का आधार बनते हैं।
*रक्तदान के दौरान बरती जाने वाली सावधानियां जिनका ख्याल रखना बहुत जरूरी है।*
प्रत्येक स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में, जिसका वजन 45 किग्रा से अधिक है, सामान्यतः 5-6 लीटर रक्त होता है।
रक्तदान के दौरान मात्र 300 मिलीमीटर रक्त लिया जाता है। शरीर इस रक्त की आपूर्ति मात्र 24 से 48 घंटे कर लेता है।
मनुष्य के शरीर में वजन का 7 प्रतिशत रक्त होता है।
18 से 60 वर्ष का कोई भी व्यक्ति, जो स्वस्थ हो रक्तदान कर सकता है।
रक्तदाता का शारीरिक भार 45 किग्रा से कम नही होना चाहिए।
जिन लोगों ने टैटू गुदवाया – हो वो टैटू गुदवाने के एक साल बाद रक्तदान कर सकते हैं।
रक्तदान करने वाला नशा या मादक पदार्थ लेने वाला या मिरगी आदि का रोगी से खून नही लिया जाता है।
स्वैच्छिक रूप से रक्तदान करने वाला चुस्त- दुरुस्त होना चाहिए।
हीमोग्लोबिन की मात्रा 12.5 ग्राम से कम नहीं होना चाहिए।
रक्तदाता का रक्तचाप उच्चतम 100 से 180 के बीच होनी चाहिए।
महिला रक्तदान कर रही है, तो वह गर्भवती न हो।
डेंगू, मलेरिया, हेपेटाइटिस बी या सी से ग्रस्त व्यक्ति पूरी तरह ठीक होने के एक वर्ष बाद ही रक्तदान करना चाहिए।
मधुमेह या सिजोफ्रेनिया की बीमारी वाले व्यक्ति को रक्तदान नहीं करना चाहिए ।
रक्तदान के लिए पुरुष हर 3 महीने (12 सप्ताह) में और महिलाएं हर 4 महीने (16सप्राह) में पात्र होती है।
रक्तदान करने के पहले रक्तदाता को भरपेट खाना और पूरी नींद जरूर लेनी चाहिए।
रक्तदान करने के तुरंत बाद शारीरिक श्रम नहीं करना चाहिए।
रक्तदान करने के बाद तरल पदार्थ जैसे काफ़ी ,जूस, दूध, पानी आदि का सेवन करना चाहिए।
रक्तदान के कुछ घंटे बाद तक वहां नहीं चलना चाहिए।
ओ-नेगेटिव रक्त सभी ब्लड शुगर को दिया जा सकता है। इस यूनिवर्सल डोनर कहते हैं। ए-बी, पॉजिटिव सभी को प्लाज्मा दे सकते हैं।
भारत में हर वर्ष लगभग 5 करोड़ यूनिट रक्त की जरूरत होती है, लेकिन उपलब्धता आधी ही होती है। वैसे 2015 की रिसर्च के मुताबिक हर साल एक बार रक्तदान करने से इंसान की जीवन प्रत्याशा दर में 7.5 प्रतिशत इजाफा होता है। आदर्श रक्तदान से हार्ट अटैक का खतरा 88 प्रतिशत कम होता है। रक्तदान के प्रति जागरूकता जिस स्तर पर लाई जानी चाहिए थी, उस स्तर पर न तो कोशिश हुई और न लोग जागरूक हुए। अब रक्तदान करने के प्रचार-प्रसार एवं स्वयं सैवी संगठनों ने रक्तदान शिविर आयोजित करके जागरूकता बढाने की दिशा में अवश्य स्वस्थ नागरिकों को जागरूक किया है है।