होलिका दहन और विकास परियोजनाओं के नाम पर हरे भरे पेड़ काटना अपराध नहीं पाप है

होलिका दहन और विकास परियोजनाओं के नाम पर हरे भरे पेड़ काटना अपराध नहीं पाप है
– डॉ. बी.आर. नलवाय, मंदसौर (म.प्र.)

अक्सर होली पर हरे भरे पेड़ पीपल, नीम, इमली इसी प्रकार के कई अन्य वॄक्ष को काटते हुए देखा गया है। यही नहीं विकास परियोजनाओं के नाम पर वृक्षों की बलि देना अनिवार्य सा प्रतीत हो रहा है | यकीनन कानूनन क्षतिपूर्ति पौधारोपण का प्रावधान से करना अनिवार्य होता है, किंतु पौधारोपण की गति विगत वर्षों की कटाई की तुलना में 30% भी नहीं हो पाती है। इस तरह वृक्षों की अंधाधुंध कटाई पर शीघ्र अंकुश नहीं लगाया गया तो भविष्य में इसके भयावह परिणाम झेलने पड़ सकते हैं। इसलिए सरकार, उद्योगपति और आम नागरिक को इसमें एकजुट होकर हरित संपदा के संरक्षण में ठोस प्रयास करना चाहिए। स्मरण रहे कि कोरोना काल में ऑक्सीजन के संकट ने लोगों की जान ले ली है। फिर भी लोग पेड़ों का महत्व नहीं समझे।

इसी को ध्यान रखते हुए— सिंगोरी वन अभ्यारण में पेड़ काटनेवाले एक आरोपी छोटेलाल पर बम्होरी वन विभाग ने एक करोड़ 21 लाख 7400/ ₹ का जुर्माना लगाया है, यह दोनों पेड़ सागौर के थे। वन विभाग ने इसे वन संपदा माना और एक पेड़ की उम्र 50 साल मानकर जुर्माना लगाया। ज्ञात रहे कि 50 साल में एक पेड़ 52 लाख 400/ ₹ की कीमत की सुविधा देता है। इसमें 11,97,500 / रुपए की ऑक्सीजन देता है , जो वह छोड़ता है, यही ऑक्सीजन प्राणवायु का काम करती है । इतने सालों में यही एक पेड़ 23 लाख 68 हजार 400 /₹ का वायु प्रदूषण नियंत्रण करता है। जबकि 19 लाख 97500/₹ मूल्य की भू- संरक्षण नियंत्रण व उर्वरता बढ़ाने में सहयोग करता है। बारिश में पानी रोकने, कटाव रोकने, जल को रीसाइकिल करने में 4,37,000/₹ की मदद देता है । इस तरह एक पेड़ 50 साल में 52 लाख 400/₹ से अधिक का फायदा पहुंचाता है। पेड़ काटना घोर अपराध और पाप भी है। किसी ने तो यहां तक कहा है कि “फलदार वृक्ष या जीवित वृक्ष को काटने एवं किसी मनुष्य की हत्या करने का पाप एक समान ही होता है” ” पेड़ काटने से बचने एवं काटते हुए व्यक्ति को मना करना चाहिए ,अन्यथा पेड़ को होनेवाली हानि नुकसान के आधार पर जुर्माना और कड़ी सजा दोनों एक साथ दी जा सकती है।

यहां यह स्पष्ट है कि पिछले 5 सालों में 15 लाख से अधिक वृक्षों की कटाई की गई है, या यू कहें बली चढ़ा दी गई है , तो कोई अतिशयोक्ति नहीं। इससे मध्य प्रदेश भी पारिस्थितिकी गंभीर संकट का सामना कर रहा है। बेलगाम वनों की कटाई ने न केवल वन्य जीवों के प्राकृतिक आवास का विनाश किया , बल्कि जलवायु परिवर्तन, मिट्टी के संरक्षण, वायु प्रदूषण और जैव विविधता के शरण को भी बढ़ाया है। यदि देखा जाए तो पौधारोपण की गति वृक्षारोपण की कटाई की तुलना में नगण्य है, जिससे प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हो रहा है। आधुनिकीकरण, नगरीकरण और बुनियादी ढांचे के विस्तार के नाम पर वनों को लगातार नष्ट किया जा रहा है।

आज हमारे देश में वनों का क्षेत्रफल देश के क्षेत्रफल का एक तिहाई होना चाहिए, जो बहुत कम है। कुछ लोगों द्वारा इस प्रकार वनों की अंधाधुंध कटाई के कारण वातावरण में प्रदूषण की समस्या उत्पन्न हो रही है। विकासशील परियोजनाओं के लिए वनों की बलि देना अनिवार्य सा होता जा रहा है। इसलिए विकास के नाम पर जिस तरह से वृक्ष की कटाई की जा रही, वह गंभीर चिंता का विषय है। यहां केवल पीपल के वृक्ष को देखें तो 1 घंटे में 9,622 किलो अशुद्ध वायु यानी कार्बन डाइऑक्साइड वह बचा लेता है। सभी वृक्ष में पीपल के वृक्ष को श्रेष्ठ माना गया है। हिंदू धर्म में पीपल के वृक्ष की पूजा की जाती है, और उसे काटना भी पाप माना गया है। किसी ने तो यहां तक कहा कि फलदार वृक्ष या जीवित वृक्ष को काटने एवं किसी मनुष्य की हत्या करने का पाप एक समान होता है। जब मनुष्य पौधा रोपण करता है, उस मनुष्य को परलोक में भी वे वृक्ष उनके पुत्र होकर जन्म लेते हैं। हमारे पूर्वजों की स्मृति में पौधा रोपण अवश्य ही करना चाहिए। विभिन्न संस्कारों के अवसर पर, आर्थिक लाभ होने पर, परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर, रोजगार मिलने पर, धार्मिक एवं राष्ट्रीय त्योहार पर किसी की खुशी के अवसर पर, रोजगार मिलने पर, पौधा रोपण करने का पूर्ण लाभ प्राप्त करना चाहिए। वृक्षों के काटने से बचें एवं काटते हुए व्यक्ति को मना करें, इससे पुण्य मिलेगा।

 

About The Author

'Bolo Zindagi' s Founder & Editor Rakesh Singh 'Sonu' is Reporter, Researcher, Poet, Lyricist & Story writer. He is author of three books namely Sixer Lalu Yadav Ke (Comedy Collection), Tumhen Soche Bina Nind Aaye Toh Kaise? (Song, Poem, Shayari Collection) & Ek Juda Sa Ladka (Novel). He worked with Dainik Hindustan, Dainik Jagran, Rashtriya Sahara (Patna), Delhi Press Bhawan Magazines, Bhojpuri City as a freelance reporter & writer. He worked as a Assistant Producer at E24 (Mumbai-Delhi).

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