पर्याप्त नींद रात्रि में, हल्की झपकी दोपहर में पर्याप्त है, क्यों ?

पर्याप्त नींद रात्रि में, हल्की झपकी दोपहर में पर्याप्त है, क्यों ?
– डॉ. बी.आर. नलवाय , पूर्व
विभागाध्यक्ष एवं शोध निदेशक – वाणिज्य
शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मंदसौर (म.प्र.)

नींद का मनुष्य के जीवन में एक महत्वपूर्ण पक्ष है। मनुष्य अपने जीवन का एक तिहाई हिस्सा सोते हुए गुजार देता है। नींद में परिवर्तन होने से मनुष्य की कार्य क्षमता पर भी बहुत प्रभाव पड़ता है। आखिर नींद के लिए लोग इतना परेशान क्यों होते हैं ? क्योंकि नींद एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसके द्वारा शरीर आराम पाता है। गहरी नींद से व्यक्ति तनाव रहित हो जाता है। हमें तब तक नींद नहीं आती है ,जब तक की दिमाग का दुनिया से सीधा नाता जुड़ा होता है, और दिमाग एवं देह दोनों ही हरकत में चलते रहते हैं। स्पष्ट है कि जब तक तनाव रहता है तब तक नींद नहीं आती और जहां विचार बिल्कुल खत्म हो जाते हैं तब नींद अचानक आ जाती है। इसलिए यह जरूरी है कि सोने के समय अपने चिंतन को बिल्कुल बंद कर देना चाहिये।

भागदौड़ की जिंदगी और काम के दबाव के कारण हर व्यक्ति सही मात्रा में नींद नहीं ले पा रहा है। वही दुनिया में अमेरिका से लेकर भारत तक में बेहतर नींद के लिए सप्लीमेंट्स लेनेवालों की संख्या बढ़ रही है। अमेरिका में रोग नियंत्रण केंद्र के अनुसार 18 प्रतिशत लोग बेहतरीन नींद लिए स्लिप सप्लीमेंट्री लेते हैं, वहीं भारत में यह संख्या करीब 12 प्रतिशत है। जीवन शैली के बदलाव में सामान्य दवाओ ,प्राकृतिक उपचार, थैरेपी की तकनीकों के साथ लेने को स्लिप सप्लीमेंट कहते हैं। रात की बेहतरीन नींद ही शरीर को दिन भर काम करने की ऊर्जा प्रदान करती है। यह इम्यूनट सिस्टम को बेहतर बनाती है । तनाव घटाती है, मस्तिष्क के रूप में कार्य करने की क्षमता को बेहतर बनाती है । देखा गया है, भारतीय दुनिया भर में कम नींद लेने के मामले में दूसरे नंबर पर हैं। भारतीय ओसतन 7.1 घंटे की नींद लेते हैं जो कि अच्छी सेहत के लिए निर्धारित 7 से 9 घंटे की नींद पर्याप्त होनी चाहिए। कम नींद के कारण ही समस्या बनकर उभरती है।

एक ताजा रिपोर्ट के अनुसार देश में स्लिप डिवोर्स का चलन तेजी से बढ़ रहा है। हालत यह है कि अच्छी नींद और निरोगी काया के लिए 78 प्रतिशत भारतीय जोड़े अलग-अलग नींद का आनंद लेते हैं, सोने का विकल्प चुनते हैं । नींद की कमी गंभीर स्वास्थ्य जोखिम से जुड़ी है । इसमें मानसिक तनाव, खतरनाक ड्राइविंग प्रमुख है, नींद में बाधा डालने वाले कारणों में साथी का खर्राटे लेना ,तेज सांस लेना, बेचैनी, असामान्य नींद का समय और बिस्तर पर लेकर स्क्रीन का उपयोग किया जाना । वे लोग जो अलग-अलग सोने का विकल्प चुनते हैं। बेहतर नींद की गुणवत्ता और स्थिर या बेहतर रिश्तों की बात कहते हैं।
वैसे एक्सपर्ट का कहना है कि साथ सोने के भी फायदे हैं। यह ऑक्सीटोसिन (लव हारमोंस) को बढ़ाता है, जिससे तनाव के स्तर में कमी आती है।

अमेरिकी डॉक्टर शिपर्स ने कहा “निद्रा का सबसे प्रमुख शत्रु है चिंता” अतः हमें चिंता रहित होकर सोना चाहिए। बिस्तर पर लेटने के पश्चात ना तो आनेवाले कल के बारे में और ना ही दिनभर के कार्यकलापों के बारे में विचार करना चाहिए। लेटते ही बिजली के स्विच की भांति विचारों के स्विच को भी बंद कर देना चाहिए। नींद के लिए गोलियों का सेवन भी किया जाता है जो कि स्वास्थ्य के लिए बहुत नुकसानदेह होता है।
नींद सैकड़ों मर्ज की एक दवा, लेकिन आज तनाव और चिंता के दौर में नींद कहीं काफूर हो गई है और सुबह बड़ी बोझिल लगती है। इसलिए आज हमें यह देखना है कि गहरी नींद में शरीर के अंग प्रत्यंग को आराम मिलता है ,खर्च हुई शक्ति पुनः प्राप्त होती है। गहरी नींद में श्वास गति धीमी होकर नाड़ी धीरे धीरे चलती है। मस्तिष्क में रक्त प्रवाह कम होकर स्पर्श और श्रवण शक्ति का लोप हो जाता है। नींद खुलने पर पहले श्रवण तत्पश्चात स्पर्श शक्ति लौटती है। नेपोलियन बोनापार्ट कम समय सोता था ,लेकिन गहरी नींद लेता था, बिस्तर पर जाते ही क्षण भर में वह निद्रा रानी की बाहों में समा जाता था ,और वह जीवन भर निरोग रहा इसलिए गहरी नींद का आना बहुत आवश्यक है। ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री विनस्टन चर्चिल दोपहर के खाने के बाद बिस्तर पर लेटकर छोटी सी नींद जरूर लेते थे ।
दोपहर की एक छोटी सी झपकी से सतर्कता एवं याददाश्त में अच्छा सुधार होता है। यह झपकी अधिकतम 30 मिनट तक के लिए पर्याप्त है। अगर 30 मिनट से ज्यादा झपकी लेते हैं, तो आप गहरी नींद में चले जाते हैं, ऐसे में उठने के बाद तरोताजा महसूस होने के बजाय सुस्ती और शरीर में भारीपन लगेगा। यदि 1 घंटे से ज्यादा झपकी लेते हैं, तो डायबिटीज और हार्ट की गंभीर बीमारी के पनपने का भी खतरा होता है, इसके साथ ही लंबी झपकी को अल्जाइमर के खतरे को भी देखा गया। यह स्पष्ट है कि नियमित झपकी लेनेवालों में दिल की बीमारी से मौत का खतरा 37 प्रतिशत कम होता है, तब जब आपकी झपकी 30 मिनट से अधिक नहीं होनी चाहिए।

विश्व में सबसे अधिक साधन संपन्न धनी राष्ट्र अमेरिका में लाखों लोगों को नींद नहीं आती है, यह लोग रोजाना नींद की दवाइयां खाकर बिस्तर पर जाते हैं। अन्य देशों के लोगों की भी लगभग ऐसी ही स्थिति है। नींद उम्र की अलग-अलग पड़ावो में कम ज्यादा होती रहती है, नवजात शिशु 24 घंटे में से 20 घंटे तक सोता है फिर क्रमशः नींद की आवश्यकता घटती जाती है। डॉक्टरों का कहना है कि एक स्वस्थ मनुष्य के लिए औसतन 6 से 7 घंटे की नींद पर्याप्त होती है। अनिद्रा के अतिरिक्त अधिक देर तक सोना भी आलस्य की निशानी है एवं स्वास्थ्य के लिए हानिकारक भी है। नींद और भूख जितनी बढ़ाओ उतनी बढ़ जाती है एवं जितनी घटाओ उतनी घट जाती है ,दोनों का एक जैसा स्वभाव है।

गहरी नींद से संपूर्ण शरीर को विश्रांति एवं उचित पोषण मिलता है। अत्याधिक शारीरिक एवं मानसिक श्रम के पश्चात खोई हुई शक्ति पाने के लिए गहरी नींद का झोंका भी कम महत्वपूर्ण नहीं है, इससे भी मस्तिष्क को पूरा पूरा आराम मिल जाता है और मन स्फूर्तिमय हो जाता है इसलिए सफर के दौरान ड्राइवर को पर्याप्त नींद लेना चाहिए अन्यथा हल्की झपकी आने से बहुत बड़ी दुर्घटना हो सकती है।
नींद लाने के कुछ उपाय के पहले देखा जाए तो एक रात का जागरण घातक तो नहीं होता परंतु अगला दिन चिड़चिड़ाहट और थकान भरा होता है। लगातार दो-तीन दिनों तक जागते रहने से विचार करने की क्षमता भी समाप्त हो जाती है। यदि किसी भी व्यक्ति को जबरन अधिक दिनों तक जगाए रखा जाए तो उसकी मृत्यु तक हो सकती है इसलिए रेलवे ने ड्राइवरों व गार्ड के लिए देश के अनेकों स्टेशन पर विश्राम गृह बनाए हैं।

About The Author

'Bolo Zindagi' s Founder & Editor Rakesh Singh 'Sonu' is Reporter, Researcher, Poet, Lyricist & Story writer. He is author of three books namely Sixer Lalu Yadav Ke (Comedy Collection), Tumhen Soche Bina Nind Aaye Toh Kaise? (Song, Poem, Shayari Collection) & Ek Juda Sa Ladka (Novel). He worked with Dainik Hindustan, Dainik Jagran, Rashtriya Sahara (Patna), Delhi Press Bhawan Magazines, Bhojpuri City as a freelance reporter & writer. He worked as a Assistant Producer at E24 (Mumbai-Delhi).

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